Summary
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल अपनी फेयरवेल स्पीच में कहा कि जज भगवान नहीं होते और उनके हर फैसले का सही होना जरूरी नहीं है, न्याय के लिए विनम्रता महत्वपूर्ण है। उन्होंने संविधान और न्याय के अर्थ पर बात करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ कर्तव्य से है, न कि अनुष्ठान से।