Summary
भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम के साथ, खनन और धातु कंपनियों के लिए बोर्डरूम में संचार और हितधारक जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सफल परियोजना निष्पादन के लिए अब पूंजी, प्रौद्योगिकी और नियामक अनुमोदनों से परे हितधारक विश्वास और सामाजिक लाइसेंस बनाए रखना महत्वपूर्ण है।